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Showing posts from February, 2019
पर्दो की क्या बिसात जो दीदार को रोक दें..! नजर में धार हो तो क्या इस पार क्या उस पार..!!
एहमियत दी तो कोहिनूर खुद को मानने लगे..! कांच के टुकड़े भी क्या खूब बहम पालने लगे..!!
डिग्रीयां तो तालीम के खर्चों की रसीदें है..! इल्म वही है जो किरदार में झलकता है..!!
दावा वफा का और तमन्ना जिस्म की..! अगर ये इश्क है तो हवस क्या है..!!
ठहाके ना जाने कहा छोड़ आये हम..! अब तो रिवाज है बस मुस्कुराने का..!!
कितने शौक से छोड़ दिया तुमने बात करना..! जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम..!!
दुनिया वो किताब है, जो कभी नहीं पढ़ी जा सकती..! लेकिन जमाना वो उस्ताद है, जो सबकुछ सिखा देता है ..!!